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ramayan 2.119.21: 'रघुकुलभूषण! यह वह मार्ग है जिससे बड़े-बड़े ऋषिगण फल-मूल इकट्ठा करने के लिए वन के भीतर जाते हैं। आप भी इसी मार्ग से इस दुर्गम वन में प्रवेश करें।'॥21॥   |   ramayan सर्ग 2.119: अनसूया की आज्ञा से सीता का उनके दिये हुए वस्त्राभूषणों को धारण करके श्रीरामजी के पास आना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 119: अनसूया की आज्ञा से सीता का उनके दिये हुए वस्त्राभूषणों को धारण करके श्रीरामजी के पास आना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.119.21 
एष पन्था महर्षीणां फलान्याहरतां वने।
अनेन तु वनं दुर्गं गन्तुं राघव ते क्षमम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'रघुकुलभूषण! यह वह मार्ग है जिससे बड़े-बड़े ऋषिगण फल-मूल इकट्ठा करने के लिए वन के भीतर जाते हैं। आप भी इसी मार्ग से इस दुर्गम वन में प्रवेश करें।'॥21॥
 
'Raghukulabhushan! This is the path by which great sages go inside the forest to collect fruits and roots. You should also enter this inaccessible forest by this path.'॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)