श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 119: अनसूया की आज्ञा से सीता का उनके दिये हुए वस्त्राभूषणों को धारण करके श्रीरामजी के पास आना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.119.17 
तस्यां रात्र्यां व्यतीतायामभिषिच्य हुताग्निकान्।
आपृच्छेतां नरव्याघ्रौ तापसान् वनगोचरान्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जब रात्रि बीत गई और वन में सभी तपस्वी ऋषिगण स्नान करके अग्निहोत्र कर चुके, तब सिंहपुरुष श्री राम और लक्ष्मण ने उनसे जाने की अनुमति मांगी॥17॥
 
After the night had passed and all the ascetic sages in the forest had bathed and performed Agnihotra, then the lion-man Sri Rama and Lakshmana asked them for permission to leave.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)