Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.119.16: तत्पश्चात समस्त तपस्वियों द्वारा सम्मानित रघुकुलनन्दन श्री राम, अनसूया द्वारा दिए गए पवित्र आभूषणों से विभूषित चन्द्रमुखी सीता को देखकर बड़ी प्रसन्नता के साथ वहाँ रात भर रहे॥16॥ | ramayan सर्ग 2.119: अनसूया की आज्ञा से सीता का उनके दिये हुए वस्त्राभूषणों को धारण करके श्रीरामजी के पास आना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: स शर्वरीं प्रीत: पुण्यां शशिनिभाननाम्।
अर्चितस्तापसै: सर्वैरुवास रघुनन्दन:॥ १६॥
अनुवाद
तत्पश्चात समस्त तपस्वियों द्वारा सम्मानित रघुकुलनन्दन श्री राम, अनसूया द्वारा दिए गए पवित्र आभूषणों से विभूषित चन्द्रमुखी सीता को देखकर बड़ी प्रसन्नता के साथ वहाँ रात भर रहे॥16॥
Thereafter, Raghukulnandan Shri Ram, who was honored by all the ascetics, stayed there for the whole night with great happiness after seeing Chandramukhi Sita adorned with the sacred ornaments given by Anasuya. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥