Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.119.14: उस समय मिथिला की पुत्री सीता ने भगवान राम को तपस्विनी अनसूया से प्राप्त हुए वस्त्र, आभूषण और हार आदि प्रेमपूर्वक उपहारों का वर्णन किया ॥14॥   |   ramayan सर्ग 2.119: अनसूया की आज्ञा से सीता का उनके दिये हुए वस्त्राभूषणों को धारण करके श्रीरामजी के पास आना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 119: अनसूया की आज्ञा से सीता का उनके दिये हुए वस्त्राभूषणों को धारण करके श्रीरामजी के पास आना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.119.14 
न्यवेदयत् तत: सर्वं सीता रामाय मैथिली।
प्रीतिदानं तपस्विन्या वसनाभरणस्रजाम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उस समय मिथिला की पुत्री सीता ने भगवान राम को तपस्विनी अनसूया से प्राप्त हुए वस्त्र, आभूषण और हार आदि प्रेमपूर्वक उपहारों का वर्णन किया ॥14॥
 
At that time, Sita, the daughter of Mithila, narrated to Lord Rama about the love-gifts of clothes, ornaments and necklaces etc. she had received from the ascetic Anasuya. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)