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ramayan 2.119.11: 'बेटी! मिथिलेश कुमारी! पहले मेरे सामने अपना श्रृंगार करो। ये दिव्य वस्त्र और आभूषण धारण करो और इनसे अपना श्रृंगार करो और मुझे प्रसन्न करो।'   |   ramayan सर्ग 2.119: अनसूया की आज्ञा से सीता का उनके दिये हुए वस्त्राभूषणों को धारण करके श्रीरामजी के पास आना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 119: अनसूया की आज्ञा से सीता का उनके दिये हुए वस्त्राभूषणों को धारण करके श्रीरामजी के पास आना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.119.11 
अलंकुरु च तावत् त्वं प्रत्यक्षं मम मैथिलि।
प्रीतिं जनय मे वत्से दिव्यालंकारशोभिनी॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'बेटी! मिथिलेश कुमारी! पहले मेरे सामने अपना श्रृंगार करो। ये दिव्य वस्त्र और आभूषण धारण करो और इनसे अपना श्रृंगार करो और मुझे प्रसन्न करो।'
 
‘Daughter! Mithilesh Kumari! First adorn yourself in front of my eyes. Wear these divine clothes and ornaments and adorn yourself with them and please me.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)