Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.118.9: 'धर्मचारिणी! इसके अतिरिक्त मेरे अन्य सम्बन्धियों ने भी मुझे जो कुछ उपदेश दिया है, उसे मैं नहीं भूली हूँ। पति की सेवा के अतिरिक्त स्त्री के लिए कोई दूसरा तप नहीं बताया गया है॥9॥ | ramayan सर्ग 2.118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न विस्मृतं तु मे सर्वं वाक्यै: स्वैर्धर्मचारिणि।
पतिशुश्रूषणान्नार्यास्तपो नान्यद् विधीयते॥ ९॥
अनुवाद
'धर्मचारिणी! इसके अतिरिक्त मेरे अन्य सम्बन्धियों ने भी मुझे जो कुछ उपदेश दिया है, उसे मैं नहीं भूली हूँ। पति की सेवा के अतिरिक्त स्त्री के लिए कोई दूसरा तप नहीं बताया गया है॥9॥
'Dharmacharini! Besides this, I have not forgotten whatever advice my other relatives have given me through their words. There is no other penance prescribed for a woman except serving her husband.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥