Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.118.7: 'जब मैं अपने पति के साथ निर्जन वन में आने लगी, तब मेरी सास कौशल्या ने मुझे जो कर्तव्य-विषयक उपदेश दिए थे, वे आज भी मेरे हृदय में अंकित हैं। ॥7॥ | ramayan सर्ग 2.118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आगच्छन्त्याश्च विजनं वनमेवं भयावहम्।
समाहितं हि मे श्वश्र्वा हृदये यत् स्थिरं मम॥ ७॥
अनुवाद
'जब मैं अपने पति के साथ निर्जन वन में आने लगी, तब मेरी सास कौशल्या ने मुझे जो कर्तव्य-विषयक उपदेश दिए थे, वे आज भी मेरे हृदय में अंकित हैं। ॥7॥
'When I started coming to the deserted forest with my husband, the instructions on duty given to me by my mother-in-law Kausalya are still engraved in my heart. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥