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ramayan 2.118.48: महाबली और पराक्रमी श्री रामजी ने पलक झपकते ही धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर उसे तुरन्त अपने कानों तक खींच लिया॥ 48॥   |   ramayan सर्ग 2.118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.118.48 
निमेषान्तरमात्रेण तदानम्य महाबल:।
ज्यां समारोप्य झटिति पूरयामास वीर्यवान्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
महाबली और पराक्रमी श्री रामजी ने पलक झपकते ही धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर उसे तुरन्त अपने कानों तक खींच लिया॥ 48॥
 
'The mighty and most valiant Sri Rama strung the bow in the blink of an eye and instantly drew it till his ears.॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)