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ramayan 2.118.47: ‘महान् ब्राह्मण विश्वामित्र के ऐसा कहने पर मेरे पिता ने वह दिव्य धनुष मंगवाया और राजकुमार श्रीराम को दिखाया।   |   ramayan सर्ग 2.118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.118.47 
इत्युक्तस्तेन विप्रेण तद् धनु: समुपानयत्।
तद् धनुर्दर्शयामास राजपुत्राय दैविकम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
‘महान् ब्राह्मण विश्वामित्र के ऐसा कहने पर मेरे पिता ने वह दिव्य धनुष मंगवाया और राजकुमार श्रीराम को दिखाया।
 
‘Upon the great Brahmin Visvamitra saying this, my father called for that divine bow and showed it to Prince Shri Ram.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)