Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.118.44-45: तत्पश्चात् बहुत काल के पश्चात् ये महान रघुकुल-नन्दन सत्यपराक्रमी श्री राम अपने भाई लक्ष्मण सहित विश्वामित्रजी के साथ मेरे पिता का यज्ञ देखने के लिए मिथिला में आये। उस समय मेरे पिता ने पुण्यात्मा विश्वामित्र मुनि का बड़ा आदर किया। 44-45॥   |   ramayan सर्ग 2.118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना  »  श्लोक 44-45
 
 
श्लोक  2.118.44-45 
सुदीर्घस्य तु कालस्य राघवोऽयं महाद्युति:।
विश्वामित्रेण सहितो यज्ञं द्रष्टुं समागत:॥ ४४॥
लक्ष्मणेन सह भ्रात्रा राम: सत्यपराक्रम:।
विश्वामित्रस्तु धर्मात्मा मम पित्रा सुपूजित:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् बहुत काल के पश्चात् ये महान रघुकुल-नन्दन सत्यपराक्रमी श्री राम अपने भाई लक्ष्मण सहित विश्वामित्रजी के साथ मेरे पिता का यज्ञ देखने के लिए मिथिला में आये। उस समय मेरे पिता ने पुण्यात्मा विश्वामित्र मुनि का बड़ा आदर किया। 44-45॥
 
'After that, after a long time, this great Raghukul-Nandan Satyaprakrami Shri Ram along with his brother Lakshman came to Mithila to see my father's yagya along with Vishwamitraji. At that time my father showed great respect to the virtuous Vishwamitra Muni. 44-45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)