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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना
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श्लोक 42
श्लोक
2.118.42
इदं च धनुरुद्यम्य सज्यं य: कुरुते नर:।
तस्य मे दुहिता भार्या भविष्यति न संशय:॥ ४२॥
अनुवाद
'जो मनुष्य इस धनुष को उठाकर इस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, मेरी पुत्री सीता उसकी पत्नी होगी; इसमें कोई संदेह नहीं है।'
'The man who will lift this bow and string it, my daughter Sita will be his wife; there is no doubt about this.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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