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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.118.37 
अयोनिजां हि मां ज्ञात्वा नाध्यगच्छत् स चिन्तयन्।
सदृशं चाभिरूपं च महीपाल: पतिं मम॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
राजा ने मुझे गर्भहीन कन्या समझकर मेरे लिए योग्य तथा अत्यंत सुन्दर वर के विषय में विचार करना आरम्भ किया; किन्तु वे किसी निर्णय पर नहीं पहुँच सके।
 
‘Considering me to be a girl without a womb, the king began to think of a suitable and most handsome husband for me; but he could not arrive at any decision.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)