Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.118.33: 'उन्होंने मुझे बड़ी रानी को दे दिया, जो सदाचार में तत्पर और उन्हें अत्यंत प्रिय थी। उस ममतामयी रानी ने मुझे मातृवत स्नेह से पाला॥ 33॥   |   ramayan सर्ग 2.118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.118.33 
दत्ता चास्मीष्टवद्देव्यै ज्येष्ठायै पुण्यकर्मणे।
तया सम्भाविता चास्मि स्निग्धया मातृसौहृदात्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
'उन्होंने मुझे बड़ी रानी को दे दिया, जो सदाचार में तत्पर और उन्हें अत्यंत प्रिय थी। उस ममतामयी रानी ने मुझे मातृवत स्नेह से पाला॥ 33॥
 
‘He gave me to the elder queen, who was devoted to virtue and who was very dear to him. That loving queen brought me up with motherly affection.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)