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ramayan 2.118.29: राजा उस खेत में अपनी मुट्ठी से जड़ी-बूटियाँ बो रहे थे। तभी उनकी नज़र मुझ पर पड़ी। मेरे शरीर के सभी अंग धूल से सने हुए थे। मुझे उस हालत में देखकर राजा जनक बहुत हैरान हुए।   |   ramayan सर्ग 2.118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.118.29 
स मां दृष्ट्वा नरपतिर्मुष्टिविक्षेपतत्पर:।
पांसुगुण्ठितसर्वाङ्गीं विस्मितो जनकोऽभवत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
राजा उस खेत में अपनी मुट्ठी से जड़ी-बूटियाँ बो रहे थे। तभी उनकी नज़र मुझ पर पड़ी। मेरे शरीर के सभी अंग धूल से सने हुए थे। मुझे उस हालत में देखकर राजा जनक बहुत हैरान हुए।
 
‘The king was sowing medicinal herbs in that field with his fist. Just then his eyes fell on me. All my body parts were covered with dust. King Janaka was very surprised to see me in that condition.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)