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ramayan 2.118.26: उनकी आज्ञा पाकर सीता ने धर्मपरायण तपस्वी अनसूया से कहा, ‘माता! आप सुनिए।’ ऐसा कहकर वे इस प्रकार कथा कहने लगीं।   |   ramayan सर्ग 2.118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.118.26 
एवमुक्ता तु सा सीता तापसीं धर्मचारिणीम्।
श्रूयतामिति चोक्त्वा वै कथयामास तां कथाम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
उनकी आज्ञा पाकर सीता ने धर्मपरायण तपस्वी अनसूया से कहा, ‘माता! आप सुनिए।’ ऐसा कहकर वे इस प्रकार कथा कहने लगीं।
 
On his command, Sita said to the virtuous Tapasi Anasuya, 'Mother! Please listen.' Saying so, she started narrating the story in this manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)