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ramayan 2.118.23: तत्पश्चात् उत्तम व्रतों का दृढ़तापूर्वक पालन करने वाली अनसूया अपने पास बैठी हुई सीता से इस प्रकार अत्यन्त प्रिय कथा कहने लगीं -॥23॥   |   ramayan सर्ग 2.118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.118.23 
तथा सीतामुपासीनामनसूया दृढव्रता।
वचनं प्रष्टुमारेभे कथां कांचिदनुप्रियाम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उत्तम व्रतों का दृढ़तापूर्वक पालन करने वाली अनसूया अपने पास बैठी हुई सीता से इस प्रकार अत्यन्त प्रिय कथा कहने लगीं -॥23॥
 
Thereafter Anasuya, who was firmly observing the best vows, began asking Sita, who was sitting near her, to narrate a very favourite story in this manner -॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)