Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.118.17: सीता की यह बात सुनकर धर्म जानने वाली अनसूया अत्यन्त प्रसन्न हुईं और बोलीं, 'सीते! मैं तुम्हारी निष्कामता से अत्यन्त प्रसन्न हूँ (अथवा तुम्हारी निष्कामता के कारण मैं तुम्हें अवश्य प्रसन्न करूँगी)।॥17॥ | ramayan सर्ग 2.118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सा त्वेवमुक्ता धर्मज्ञा तया प्रीततराभवत्।
सफलं च प्रहर्षं ते हन्त सीते करोम्यहम्॥ १७॥
अनुवाद
सीता की यह बात सुनकर धर्म जानने वाली अनसूया अत्यन्त प्रसन्न हुईं और बोलीं, 'सीते! मैं तुम्हारी निष्कामता से अत्यन्त प्रसन्न हूँ (अथवा तुम्हारी निष्कामता के कारण मैं तुम्हें अवश्य प्रसन्न करूँगी)।॥17॥
On hearing Sita say this, Anasuya, who knew Dharma, was very pleased. She said, 'Sita! I am very pleased with your selflessness (or I will definitely make you happy because of your selflessness).॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥