Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.118.16: यह वचन सुनकर सीता को बड़ा आश्चर्य हुआ। मंद-मंद मुस्कुराते हुए उन्होंने तप शक्ति से संपन्न अनसूया से कहा - 'आपने अपने वचन मात्र से ही मेरा समस्त मनोवांछित कार्य संपन्न कर दिया है, अब कुछ और करने की आवश्यकता नहीं है।' | ramayan सर्ग 2.118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह वचन सुनकर सीता को बड़ा आश्चर्य हुआ। मंद-मंद मुस्कुराते हुए उन्होंने तप शक्ति से संपन्न अनसूया से कहा - 'आपने अपने वचन मात्र से ही मेरा समस्त मनोवांछित कार्य संपन्न कर दिया है, अब कुछ और करने की आवश्यकता नहीं है।'
Sita was very surprised to hear this statement. Smiling softly, she said to Anasuya who was endowed with the power of penance - 'You have done all my desired work with your words only, now there is no need to do anything else'.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥