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ramayan 2.118.12: बहुत सी पतिव्रता स्त्रियाँ जो पतिव्रता धर्म का दृढ़तापूर्वक पालन करती हैं, अपने पुण्य कर्मों के कारण स्वर्ग में सम्मानित हो रही हैं।॥12॥   |   ramayan सर्ग 2.118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.118.12 
एवंविधाश्च प्रवरा: स्त्रियो भर्तृदृढव्रता:।
देवलोके महीयन्ते पुण्येन स्वेन कर्मणा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
बहुत सी पतिव्रता स्त्रियाँ जो पतिव्रता धर्म का दृढ़तापूर्वक पालन करती हैं, अपने पुण्य कर्मों के कारण स्वर्ग में सम्मानित हो रही हैं।॥12॥
 
‘Many virtuous women who have firmly followed the path of chastity are being honoured in heaven by the virtue of their good deeds.’॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)