Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.117.9-11: तत्पश्चात, उन्होंने श्री रामचन्द्रजी को धर्मात्मा तपस्विनी अनसूया का परिचय देते हुए कहा - 'एक समय दस वर्षों तक वर्षा नहीं हुई। उस समय जब सारा जगत निरन्तर जल रहा था, तब जिन्होंने घोर तप से संपन्न तथा कठोर नियमों से विभूषित होकर अपनी तपस्या के प्रभाव से यहाँ फल-मूल उत्पन्न किए तथा मंदाकिनी की पवित्र धारा प्रवाहित की। और हे प्रिये! जिन्होंने दस हजार वर्षों तक घोर तपस्या करके तथा अपने उत्तम व्रतों के प्रभाव से ऋषियों के समस्त संकट दूर किए, वे ही देवी अनसूया हैं।' | ramayan सर्ग 2.117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात, उन्होंने श्री रामचन्द्रजी को धर्मात्मा तपस्विनी अनसूया का परिचय देते हुए कहा - 'एक समय दस वर्षों तक वर्षा नहीं हुई। उस समय जब सारा जगत निरन्तर जल रहा था, तब जिन्होंने घोर तप से संपन्न तथा कठोर नियमों से विभूषित होकर अपनी तपस्या के प्रभाव से यहाँ फल-मूल उत्पन्न किए तथा मंदाकिनी की पवित्र धारा प्रवाहित की। और हे प्रिये! जिन्होंने दस हजार वर्षों तक घोर तपस्या करके तथा अपने उत्तम व्रतों के प्रभाव से ऋषियों के समस्त संकट दूर किए, वे ही देवी अनसूया हैं।'
Thereafter, while introducing the religious ascetic Anasuya to Shri Ramchandra, he said - 'Once, there was no rain for ten years. At that time, when the whole world was burning continuously, then the one who, endowed with fierce austerities and adorned with strict rules, by the effect of her austerities, produced fruits and roots here and made the holy stream of Mandakini flow. And dear! The one who by performing heavy austerities for ten thousand years and by the effect of her excellent fasts, removed all the problems of the sages, is this goddess Anasuya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥