Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.117.7-8: समस्त प्राणियों के कल्याण में सदैव तत्पर रहने वाले पुण्यात्मा महर्षि अत्रि ने अपने पास आई हुई तपस्वी एवं धर्मपरायण वृद्धा महाभागा अनसूया को, जो सर्वत्र पूज्य थीं, सान्त्वनापूर्ण वचनों से संतुष्ट करते हुए कहा - 'देवि! आप विदेहनन्दिनी सीता को आतिथ्यपूर्वक अपने हृदय में धारण करें।' | ramayan सर्ग 2.117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
समस्त प्राणियों के कल्याण में सदैव तत्पर रहने वाले पुण्यात्मा महर्षि अत्रि ने अपने पास आई हुई तपस्वी एवं धर्मपरायण वृद्धा महाभागा अनसूया को, जो सर्वत्र पूज्य थीं, सान्त्वनापूर्ण वचनों से संतुष्ट करते हुए कहा - 'देवि! आप विदेहनन्दिनी सीता को आतिथ्यपूर्वक अपने हृदय में धारण करें।'
The virtuous sage Atri, who is always ready for the welfare of all living beings, addressed Mahabhaga Anasuya, an ascetic and devout old wife respected by everyone, who had come near him, and satisfied her with consoling words and said - 'Devi! Take Viderajnandini Sita to your heart with hospitality. 7-8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥