Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.117.23: 'चाहे उनके पति नगर में हों या वन में, चाहे वे अच्छे हों या बुरे, जो स्त्रियाँ उनसे प्रेम करती हैं, वे महान् और समृद्ध लोकों को प्राप्त करती हैं॥ 23॥ | ramayan सर्ग 2.117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नगरस्थो वनस्थो वा शुभो वा यदि वाशुभ:।
यासां स्त्रीणां प्रियो भर्ता तासां लोका महोदया:॥ २३॥
अनुवाद
'चाहे उनके पति नगर में हों या वन में, चाहे वे अच्छे हों या बुरे, जो स्त्रियाँ उनसे प्रेम करती हैं, वे महान् और समृद्ध लोकों को प्राप्त करती हैं॥ 23॥
'Whether their husbands are in the city or in the forest, whether they are good or bad, the women who love them attain the great and prosperous worlds.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥