श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 115: भरत का नन्दिग्राम में जाकर श्रीराम की चरणपादुकाओं को राज्य पर अभिषिक्त करके उन्हें निवेदन पूर्वक राज्य का सब कार्य करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.115.9 
आरुह्य तु रथं क्षिप्रं शत्रुघ्नभरतावुभौ।
ययतु: परमप्रीतौ वृतौ मन्त्रिपुरोहितै:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
रथ पर आरूढ़ होकर दोनों भाई भरत और शत्रुघ्न बहुत प्रसन्न हुए और मंत्रियों तथा पुरोहितों से घिरे हुए शीघ्रतापूर्वक वहां से चले गए।
 
After mounting on the chariot both brothers Bharata and Shatrughna were very happy and surrounded by ministers and priests, and hurriedly left the place.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)