श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 115: भरत का नन्दिग्राम में जाकर श्रीराम की चरणपादुकाओं को राज्य पर अभिषिक्त करके उन्हें निवेदन पूर्वक राज्य का सब कार्य करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.115.7 
मन्त्रिणां वचनं श्रुत्वा यथाभिलषितं प्रियम्।
अब्रवीत् सारथिं वाक्यं रथो मे युज्यतामिति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मन्त्रियों के मनभावन मधुर वचन सुनकर भरत ने सारथि से कहा, 'मेरा रथ तैयार कर दिया जाए।'
 
Having heard the pleasant words of the ministers according to his taste, Bharata said to the charioteer, 'My chariot should be harnessed and made ready.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)