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ramayan 2.115.4: महात्मा भरत के ये शुभ वचन सुनकर सभी मन्त्रियों और पुरोहित वसिष्ठ ने कहा-॥4॥   |   ramayan सर्ग 2.115: भरत का नन्दिग्राम में जाकर श्रीराम की चरणपादुकाओं को राज्य पर अभिषिक्त करके उन्हें निवेदन पूर्वक राज्य का सब कार्य करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 115: भरत का नन्दिग्राम में जाकर श्रीराम की चरणपादुकाओं को राज्य पर अभिषिक्त करके उन्हें निवेदन पूर्वक राज्य का सब कार्य करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.115.4 
एतच्छ्रुत्वा शुभं वाक्यं भरतस्य महात्मन:।
अब्रुवन् मन्त्रिण: सर्वे वसिष्ठश्च पुरोहित:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महात्मा भरत के ये शुभ वचन सुनकर सभी मन्त्रियों और पुरोहित वसिष्ठ ने कहा-॥4॥
 
On hearing these auspicious words of Mahatma Bharat, all the ministers and priest Vasishtha said -॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)