श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 115: भरत का नन्दिग्राम में जाकर श्रीराम की चरणपादुकाओं को राज्य पर अभिषिक्त करके उन्हें निवेदन पूर्वक राज्य का सब कार्य करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.115.25 
सवालव्यजनं छत्रं धारयामास स स्वयम्।
भरत: शासनं सर्वं पादुकाभ्यां निवेदयन्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
भरत भगवान् रामजी के चरणों की वंदना करके राज्य-शासन के सब कार्य करते थे और स्वयं उनके ऊपर छत्र रखते थे और पंखा झलते थे॥ 25॥
 
Bharata used to perform all the tasks of ruling the kingdom by offering prayers to the feet of Lord Rama and he would himself place an umbrella over them and wave a fan over them.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)