श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 115: भरत का नन्दिग्राम में जाकर श्रीराम की चरणपादुकाओं को राज्य पर अभिषिक्त करके उन्हें निवेदन पूर्वक राज्य का सब कार्य करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.115.22 
एवं तु विलपन् दीनो भरत: स महायशा:।
नन्दिग्रामेऽकरोद् राज्यं दु:खितो मन्त्रिभि: सह॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार दयनीय भाव से विलाप करते हुए शोकग्रस्त महायशस्वी भरत अपने मन्त्रियों के साथ नन्दिग्राम में रहकर राज्य करने लगे ॥22॥
 
In this way, mourning in a pitiful mood, the grief-stricken Mahayashasvi Bharat started ruling the kingdom by living in Nandigram along with his ministers. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)