श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 115: भरत का नन्दिग्राम में जाकर श्रीराम की चरणपादुकाओं को राज्य पर अभिषिक्त करके उन्हें निवेदन पूर्वक राज्य का सब कार्य करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.115.11 
बलं च तदनाहूतं गजाश्वरथसंकुलम्।
प्रययौ भरते याते सर्वे च पुरवासिन:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब भरत चले, तो बिना बुलाए ही उनकी हाथी, घोड़े और रथों से युक्त सारी सेना उनके पीछे हो ली और नगर के सभी नागरिक भी उनके साथ हो लिए ॥11॥
 
When Bharata set out, his entire army consisting of elephants, horses and chariots followed him without being called upon and all the citizens of the city also joined him. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)