Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.114.4: वह नगर उस पहाड़ी नदी के समान क्षीण दिखाई दे रहा था जिसका जल सूर्य की किरणों से गर्म होकर गंदला हो गया था, जिसके पक्षी गर्मी से व्याकुल होकर भाग गए थे और जिसके मछलियाँ, मछलियाँ और मगरमच्छ गहरे जल में छिप गए थे। | ramayan सर्ग 2.114: भरत के द्वारा अयोध्या की दुरवस्था का दर्शन तथा अन्तःपुर में प्रवेश करके भरत का दुःखी होना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह नगर उस पहाड़ी नदी के समान क्षीण दिखाई दे रहा था जिसका जल सूर्य की किरणों से गर्म होकर गंदला हो गया था, जिसके पक्षी गर्मी से व्याकुल होकर भाग गए थे और जिसके मछलियाँ, मछलियाँ और मगरमच्छ गहरे जल में छिप गए थे।
The city appeared as emaciated as a mountain river whose waters had become hot and muddy after being heated by the rays of the sun, whose birds had run away in anguish from the heat and whose fish, fishes and crocodiles had hidden themselves in the deep waters.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥