Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.114.29: जैसे सूर्य के अस्त हो जाने पर दिन की शोभा लुप्त हो जाती है और देवता शोक करने लगते हैं, उसी प्रकार उस समय भीतरी भवन शोभाहीन हो गया था और वहाँ के लोग शोक में डूबे हुए थे। उसे सब ओर से स्वच्छता और सजावट से रहित देखकर भरत धैर्य रखते हुए भी अत्यन्त दुःखी हुए और आँसू बहाने लगे। | ramayan सर्ग 2.114: भरत के द्वारा अयोध्या की दुरवस्था का दर्शन तथा अन्तःपुर में प्रवेश करके भरत का दुःखी होना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे सूर्य के अस्त हो जाने पर दिन की शोभा लुप्त हो जाती है और देवता शोक करने लगते हैं, उसी प्रकार उस समय भीतरी भवन शोभाहीन हो गया था और वहाँ के लोग शोक में डूबे हुए थे। उसे सब ओर से स्वच्छता और सजावट से रहित देखकर भरत धैर्य रखते हुए भी अत्यन्त दुःखी हुए और आँसू बहाने लगे।
Just as the beauty of the day vanishes when the sun sets and the gods start mourning, similarly at that time the inner palace had become unattractive and the people there were immersed in grief. Seeing it devoid of cleanliness and decoration from all sides, Bharata, despite being patient, became very sad and started shedding tears.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे चतुर्दशाधिकशततम: सर्ग:॥ ११४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें एक सौ चौदहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ११४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥