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ramayan 2.114.27-28: इस प्रकार सारथि से बातें करते हुए दुःखी भरत अपने पिता के महल में गए, जो सिंहों से रहित गुफा के समान राजा दशरथ से रहित था।   |   ramayan सर्ग 2.114: भरत के द्वारा अयोध्या की दुरवस्था का दर्शन तथा अन्तःपुर में प्रवेश करके भरत का दुःखी होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 114: भरत के द्वारा अयोध्या की दुरवस्था का दर्शन तथा अन्तःपुर में प्रवेश करके भरत का दुःखी होना  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  2.114.27-28 
इति ब्रुवन् सारथिना दु:खितो भरतस्तदा॥ २७॥
अयोध्यां सम्प्रविश्यैव विवेश वसतिं पितु:।
तेन हीनां नरेन्द्रेण सिंहहीनां गुहामिव॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सारथि से बातें करते हुए दुःखी भरत अपने पिता के महल में गए, जो सिंहों से रहित गुफा के समान राजा दशरथ से रहित था।
 
Thus talking with the charioteer, the sad Bharata went to his father's palace, which was devoid of King Dasaratha, just like a cave devoid of lions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)