Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.114.20: ‘अब वारुणी (शहद) की मादक गंध, फूलों की सुगन्धि तथा चंदन और अगुरु की पवित्र गंध चारों ओर नहीं फैल रही है।’ 20.   |   ramayan सर्ग 2.114: भरत के द्वारा अयोध्या की दुरवस्था का दर्शन तथा अन्तःपुर में प्रवेश करके भरत का दुःखी होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 114: भरत के द्वारा अयोध्या की दुरवस्था का दर्शन तथा अन्तःपुर में प्रवेश करके भरत का दुःखी होना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.114.20 
वारुणीमदगन्धश्च माल्यगन्धश्च मूर्च्छित:।
चन्दनागुरुगन्धश्च न प्रवाति समन्तत:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
‘अब वारुणी (शहद) की मादक गंध, फूलों की सुगन्धि तथा चंदन और अगुरु की पवित्र गंध चारों ओर नहीं फैल रही है।’ 20.
 
‘Now the intoxicating smell of Varuni (honey), the fragrant smell of flowers and the holy smell of sandalwood and aguru are not spreading all around. 20.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)