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ramayan 2.114.19: अब अयोध्या में पहले की तरह नाच-गाने की गम्भीर ध्वनियाँ नहीं सुनाई देतीं; यह कितना दुःखद है!॥19॥   |   ramayan सर्ग 2.114: भरत के द्वारा अयोध्या की दुरवस्था का दर्शन तथा अन्तःपुर में प्रवेश करके भरत का दुःखी होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.114.19 
किं नु खल्वद्य गम्भीरो मूर्च्छितो न निशाम्यते।
यथापुरमयोध्यायां गीतवादित्रनि:स्वन:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
अब अयोध्या में पहले की तरह नाच-गाने की गम्भीर ध्वनियाँ नहीं सुनाई देतीं; यह कितना दुःखद है!॥19॥
 
'Now the deep sounds of singing and dancing cannot be heard all around Ayodhya as before; how sad it is!॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)