Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.113.9: 'मुनि! भगवान् श्री राम अपने पराक्रम पर अडिग हैं। मैंने उनसे बहुत प्रार्थना की। गुरुजी ने भी उनसे निवेदन किया। तब वे बहुत प्रसन्न हुए और गुरुदेव वशिष्ठजी से इस प्रकार बोले -॥9॥ | ramayan सर्ग 2.113: भरत का भरद्वाज से मिलते हुए अयोध्या को लौट आना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स याच्यमानो गुरुणा मया च दृढविक्रम:।
राघव: परमप्रीतो वसिष्ठं वाक्यमब्रवीत्॥ ९॥
अनुवाद
'मुनि! भगवान् श्री राम अपने पराक्रम पर अडिग हैं। मैंने उनसे बहुत प्रार्थना की। गुरुजी ने भी उनसे निवेदन किया। तब वे बहुत प्रसन्न हुए और गुरुदेव वशिष्ठजी से इस प्रकार बोले -॥9॥
‘Muni! Lord Shri Ram is firm on his prowess. I prayed to him a lot. Guruji also requested him. Then he became very happy and said this to Gurudev Vasishthaji -॥9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥