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स तमाश्रममागम्य भरद्वाजस्य वीर्यवान्।
अवतीर्य रथात् पादौ ववन्दे कुलनन्दन:॥ ६॥
अनुवाद
महामुनि भारद्वाज के आश्रम में पहुँचकर, अपने कुल को आनन्द देने वाले पराक्रमी भरत अपने रथ से उतरे और मुनि के चरणों में प्रणाम किया।
Upon reaching the hermitage of the great sage Bharadwaj, the valiant Bharata who brought joy to his clan, alighted from his chariot and bowed down at the sage's feet.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥