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ramayan 2.113.3: वे सभी चित्रकूट नामक महान पर्वत की परिक्रमा करके अत्यंत सुन्दर मंदाकिनी नदी को पार करके पूर्व की ओर चल पड़े।   |   ramayan सर्ग 2.113: भरत का भरद्वाज से मिलते हुए अयोध्या को लौट आना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 113: भरत का भरद्वाज से मिलते हुए अयोध्या को लौट आना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.113.3 
मन्दाकिनीं नदीं रम्यां प्राङ्मुखास्ते ययुस्तदा।
प्रदक्षिणं च कुर्वाणाश्चित्रकूटं महागिरिम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वे सभी चित्रकूट नामक महान पर्वत की परिक्रमा करके अत्यंत सुन्दर मंदाकिनी नदी को पार करके पूर्व की ओर चल पड़े।
 
All of them went around the great mountain called Chitrakoot and after crossing the extremely beautiful Mandakini river they headed towards the east.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)