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ramayan 2.113.10: ‘मैं अपने पिता द्वारा दी गई प्रतिज्ञा कि मैं चौदह वर्ष तक वन में रहूँगा, उसे यथार्थ रूप से पूरा करूँगा।’॥10॥   |   ramayan सर्ग 2.113: भरत का भरद्वाज से मिलते हुए अयोध्या को लौट आना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 113: भरत का भरद्वाज से मिलते हुए अयोध्या को लौट आना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.113.10 
पितु: प्रतिज्ञां तामेव पालयिष्यामि तत्त्वत:।
चतुर्दश हि वर्षाणि या प्रतिज्ञा पितुर्मम॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘मैं अपने पिता द्वारा दी गई प्रतिज्ञा कि मैं चौदह वर्ष तक वन में रहूँगा, उसे यथार्थ रूप से पूरा करूँगा।’॥10॥
 
'I will truly fulfill the promise made by my father that I will stay in the forest for fourteen years.'॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)