Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.111.4: हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले रघुवीर! मैं तुम्हारे पिता का भी गुरु हूँ और तुम्हारा भी; अतः मेरी आज्ञा का पालन करने से तुम धर्ममार्ग को त्यागने वाले नहीं माने जाओगे॥ 4॥ | ramayan सर्ग 2.111: श्रीराम को पिता की आज्ञा के पालन से विरत होते न देख भरत का धरना देने को तैयार होना तथा श्रीराम का उन्हें समझाकर अयोध्या लौटने की आज्ञा देना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले रघुवीर! मैं तुम्हारे पिता का भी गुरु हूँ और तुम्हारा भी; अतः मेरी आज्ञा का पालन करने से तुम धर्ममार्ग को त्यागने वाले नहीं माने जाओगे॥ 4॥
'O Raghuvir, who torments the enemies! I am your father's teacher as well as yours; therefore, by obeying my orders you will not be considered as one who has forsaken the path of the virtuous.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥