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ramayan 2.110.8: 'इक्ष्वाकु के पुत्र श्रीमान कुक्षिके के नाम से प्रसिद्ध हुए। कुक्षि का वीर पुत्र विकुक्षि हुआ। 8॥   |   ramayan सर्ग 2.110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.110.8 
इक्ष्वाकोस्तु सुत: श्रीमान् कुक्षिरित्येव विश्रुत:।
कुक्षेरथात्मजो वीरो विकुक्षिरुदपद्यत॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'इक्ष्वाकु के पुत्र श्रीमान कुक्षिके के नाम से प्रसिद्ध हुए। कुक्षि का वीर पुत्र विकुक्षि हुआ। 8॥
 
'Ikshvaku's son became famous by the name of Shriman Kukshike. Kukshi's brave son became Vikukshi. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)