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ramayan 2.110.6: कश्यप से विवस्वान् का जन्म हुआ। विवस्वान् के पुत्र वास्तव में वैवस्वत मनु हुए, जो प्रथम प्रजापति थे। मनु के पुत्र इक्ष्वाकु हुए। 6॥   |   ramayan सर्ग 2.110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.110.6 
विवस्वान् कश्यपाज्जज्ञे मनुर्वैवस्वत: स्वयम्।
स तु प्रजापति: पूर्वमिक्ष्वाकुस्तु मनो: सुत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
कश्यप से विवस्वान् का जन्म हुआ। विवस्वान् के पुत्र वास्तव में वैवस्वत मनु हुए, जो प्रथम प्रजापति थे। मनु के पुत्र इक्ष्वाकु हुए। 6॥
 
Vivasvan was born from Kashyap. Vivasvan's son actually became Vaivaswat Manu, who was the first Prajapati. Manu's son became Ikshvaku. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)