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ramayan 2.110.21-22h: 'ऋषि ने प्रसन्न होकर पुत्र प्राप्ति का वरदान मांगने वाली रानी से इस प्रकार कहा - 'देवी! तुम्हें एक महाबुद्धिमान पुत्र प्राप्त होगा, जो प्रजा में प्रसिद्ध होगा, जो पुण्यात्मा होगा, शत्रुओं पर अत्यंत भयंकर प्रहार करने वाला, अपने वंश का अधिपति और शत्रुओं का नाश करने वाला होगा।' 21 1/2॥   |   ramayan सर्ग 2.110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  2.110.21-22h 
स तामभ्यवदत् प्रीतो वरेप्सुं पुत्रजन्मनि।
पुत्रस्ते भविता देवि महात्मा लोकविश्रुत:॥ २१॥
धार्मिकश्च सुभीमश्च वंशकर्तारिसूदन:।
 
 
अनुवाद
'ऋषि ने प्रसन्न होकर पुत्र प्राप्ति का वरदान मांगने वाली रानी से इस प्रकार कहा - 'देवी! तुम्हें एक महाबुद्धिमान पुत्र प्राप्त होगा, जो प्रजा में प्रसिद्ध होगा, जो पुण्यात्मा होगा, शत्रुओं पर अत्यंत भयंकर प्रहार करने वाला, अपने वंश का अधिपति और शत्रुओं का नाश करने वाला होगा।' 21 1/2॥
 
'The sage was pleased and said thus to the queen who wanted a boon for the birth of a son - 'Goddess! You will be blessed with a great-minded son, famous among the people, who will be a pious soul, extremely fierce for his enemies, a leader of his dynasty and a destroyer of enemies. 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)