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ramayan 2.11.8: हे केकयनन्दिनी! मैं अपने और अपने अन्य पुत्रों का बलिदान देकर भी श्रेष्ठ पुरुष श्री राम को चुनने के लिए तैयार हूँ। मैं उनकी शपथ लेकर कहती हूँ कि मैं आपके कहे अनुसार कार्य करूँगी।॥8॥   |   ramayan सर्ग 2.11: कैकेयी का राजा को दो वरों का स्मरण दिलाकर भरत के लिये अभिषेक और राम के लिये चौदह वर्षों का वनवास माँगना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 11: कैकेयी का राजा को दो वरों का स्मरण दिलाकर भरत के लिये अभिषेक और राम के लिये चौदह वर्षों का वनवास माँगना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.11.8 
आत्मना चात्मजैश्चान्यैर्वृणे यं मनुजर्षभम्।
तेन रामेण कैकेयि शपे ते वचनक्रियाम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे केकयनन्दिनी! मैं अपने और अपने अन्य पुत्रों का बलिदान देकर भी श्रेष्ठ पुरुष श्री राम को चुनने के लिए तैयार हूँ। मैं उनकी शपथ लेकर कहती हूँ कि मैं आपके कहे अनुसार कार्य करूँगी।॥8॥
 
'O Kekayanandini! I am ready to choose the best of men, Shri Ram, even after sacrificing myself and my other sons. I swear by him that I will fulfill what you have said.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)