Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.11.6: 'मैं उन महान वीर महात्मा श्री रामजी की शपथ खाकर कहता हूँ कि जो प्राणों से भी पूजनीय हैं और जिन्हें हराना असम्भव है, तुम्हारी यह इच्छा अवश्य पूर्ण होगी; अतः जो कुछ तुम्हारी इच्छा हो, वह मुझसे कहो॥6॥ | ramayan सर्ग 2.11: कैकेयी का राजा को दो वरों का स्मरण दिलाकर भरत के लिये अभिषेक और राम के लिये चौदह वर्षों का वनवास माँगना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तेनाजय्येन मुख्येन राघवेण महात्मना।
शपे ते जीवनार्हेण ब्रूहि यन्मनसेप्सितम्॥ ६॥
अनुवाद
'मैं उन महान वीर महात्मा श्री रामजी की शपथ खाकर कहता हूँ कि जो प्राणों से भी पूजनीय हैं और जिन्हें हराना असम्भव है, तुम्हारी यह इच्छा अवश्य पूर्ण होगी; अतः जो कुछ तुम्हारी इच्छा हो, वह मुझसे कहो॥6॥
'I swear by the great heroic Mahatma Shri Ram, who is worshipable even by one's own life and who is impossible to defeat, that your wish will be fulfilled; so tell me whatever you desire.॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥