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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 11: कैकेयी का राजा को दो वरों का स्मरण दिलाकर भरत के लिये अभिषेक और राम के लिये चौदह वर्षों का वनवास माँगना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  2.11.25-26h 
यो द्वितीयो वरो देव दत्त: प्रीतेन मे त्वया॥ २५॥
तदा देवासुरे युद्धे तस्य कालोऽयमागत:।
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! उस समय देवताओं और दानवों के युद्ध के समय आपने प्रसन्न होकर मुझे दूसरा वरदान दिया था। अब उस वरदान को ग्रहण करने का समय आ गया है।
 
'O Lord! At that time, during the war between gods and demons, you had given me the second boon which you had been pleased with. The time has come now for me to receive that boon. 25 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)