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ramayan 2.11.1: कामदेव के बाणों से पीड़ित और काम के आवेश से व्याकुल राजा दशरथ उनके पीछे-पीछे आ रहे थे। कैकेयी ने उनसे ये कठोर वचन कहे-॥1॥   |   ramayan सर्ग 2.11: कैकेयी का राजा को दो वरों का स्मरण दिलाकर भरत के लिये अभिषेक और राम के लिये चौदह वर्षों का वनवास माँगना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 11: कैकेयी का राजा को दो वरों का स्मरण दिलाकर भरत के लिये अभिषेक और राम के लिये चौदह वर्षों का वनवास माँगना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.11.1 
तं मन्मथशरैर्विद्धं कामवेगवशानुगम्।
उवाच पृथिवीपालं कैकेयी दारुणं वच:॥ १॥
 
 
अनुवाद
कामदेव के बाणों से पीड़ित और काम के आवेश से व्याकुल राजा दशरथ उनके पीछे-पीछे आ रहे थे। कैकेयी ने उनसे ये कठोर वचन कहे-॥1॥
 
King Dasharatha, afflicted by the arrows of Kamadeva and overcome by the urge of lust, was following him. Kaikeyi said these harsh words to him -॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)