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श्लोक  2.109.28 
कर्मभूमिमिमां प्राप्य कर्तव्यं कर्म यच्छुभम्।
अग्निर्वायुश्च सोमश्च कर्मणां फलभागिन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
'इस कर्मभूमि को प्राप्त करके जो भी शुभ कर्म हो, उसे करना चाहिए, क्योंकि अग्नि, वायु और सोम भी कर्मों के फल से अपने-अपने पदों के भागी हो गए हैं।
 
'After attaining this land of action, whatever auspicious deed is there, it should be performed, because Agni, Vayu and Som have also become part of their respective positions due to the results of actions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)