Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.109.26: 'मैं वन में बाहर-भीतर से पवित्र रहकर निवास करूँगा, नियमित रूप से भोजन करूँगा, देवताओं और पितरों को शुद्ध फल, मूल और पुष्पों से तृप्त करूँगा और अपनी प्रतिज्ञा पूरी करूँगा॥ 26॥ | ramayan सर्ग 2.109: श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'मैं वन में बाहर-भीतर से पवित्र रहकर निवास करूँगा, नियमित रूप से भोजन करूँगा, देवताओं और पितरों को शुद्ध फल, मूल और पुष्पों से तृप्त करूँगा और अपनी प्रतिज्ञा पूरी करूँगा॥ 26॥
'I will stay in the forest, being pure inside and out, and will eat regularly, and will satisfy the gods and forefathers with pure fruits, roots and flowers, and will fulfil my promise.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥