Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.109.20: जो धर्म पर आधारित दिखाई देता है, परन्तु वास्तव में अधर्म का ही रूप है, जिसका पालन नीच, क्रूर, लोभी और पापी मनुष्य करते हैं, ऐसे क्षत्रिय धर्म (पिता की आज्ञा का उल्लंघन करके राज्य पर अधिकार करना) को मैं अवश्य त्याग दूँगा (क्योंकि वह न्याय पर आधारित नहीं है)।॥ 20॥ | ramayan सर्ग 2.109: श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो धर्म पर आधारित दिखाई देता है, परन्तु वास्तव में अधर्म का ही रूप है, जिसका पालन नीच, क्रूर, लोभी और पापी मनुष्य करते हैं, ऐसे क्षत्रिय धर्म (पिता की आज्ञा का उल्लंघन करके राज्य पर अधिकार करना) को मैं अवश्य त्याग दूँगा (क्योंकि वह न्याय पर आधारित नहीं है)।॥ 20॥
'That which appears to be based on Dharma, but in reality is the form of Adharma (irreligion), which is followed by mean, cruel, greedy and sinful men, I shall certainly abandon such Kshatriya Dharma (of taking over the kingdom by disobeying the orders of one's father) (because it is not based on justice).॥ 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥