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ramayan 2.109.14: ‘दान, यज्ञ, होम, तप और वेद- इन सबका आधार सत्य है; इसलिए सबको सत्यनिष्ठ होना चाहिए ॥14॥   |   ramayan सर्ग 2.109: श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.109.14 
दत्तमिष्टं हुतं चैव तप्तानि च तपांसि च।
वेदा: सत्यप्रतिष्ठानास्तस्मात् सत्यपरो भवेत्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
‘दान, यज्ञ, होम, तप और वेद- इन सबका आधार सत्य है; इसलिए सबको सत्यनिष्ठ होना चाहिए ॥14॥
 
‘Donation, Yagya, Homa, penance and Vedas – the basis of all these is truth; That's why everyone should be truthful. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)