श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 109: श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.109.13 
सत्यमेवेश्वरो लोके सत्ये धर्म: सदाश्रित:।
सत्यमूलानि सर्वाणि सत्यान्नास्ति परं पदम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में सत्य ही एकमात्र ईश्वर है। धर्म सदैव सत्य के आधार पर ही विद्यमान रहता है। सत्य ही सबका मूल है। सत्य से बढ़कर कोई दूसरा परमपद नहीं है।॥13॥
 
‘Truth is the only God in this world. Dharma always exists on the basis of truth. Truth is the root of everything. There is no other supreme position greater than truth.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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